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महाभारत 5.85.12
वेद कृष्णस्य माहात्म्यं वेदास्य दृढभक्तिताम्अत्याज्यमस्य जानामि प्राणैस्तुल्यं धनंजयम्
veda kṛṣṇasya māhātmyaṃ vedāsya dṛḍhabhaktitāmatyājyamasya jānāmi prāṇaistulyaṃ dhanaṃjayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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