महाभारत 5.88.18
ह्रीमान्सत्यधृतिर्दान्तो भूतानामनुकम्पिताकामद्वेषौ वशे कृत्वा सतां वर्त्मानुवर्तते
hrīmānsatyadhṛtirdānto bhūtānāmanukampitākāmadveṣau vaśe kṛtvā satāṃ vartmānuvartate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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