महाभारत 5.88.26
क्रोधं बलममर्षं च यो निधाय परंतपःजितात्मा पाण्डवोऽमर्षी भ्रातुस्तिष्ठति शासने
krodhaṃ balamamarṣaṃ ca yo nidhāya paraṃtapaḥjitātmā pāṇḍavo'marṣī bhrātustiṣṭhati śāsane
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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