महाभारत 5.88.3
तेषां सत्त्ववतां मध्ये गोविन्दं सहचारिणम्चिरस्य दृष्ट्वा वार्ष्णेयं बाष्पमाहारयत्पृथा
teṣāṃ sattvavatāṃ madhye govindaṃ sahacāriṇamcirasya dṛṣṭvā vārṣṇeyaṃ bāṣpamāhārayatpṛthā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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