महाभारत 5.88.41
पक्ष्मसंपातजे काले नकुलेन विनाकृतान लभामि सुखं वीर साद्य जीवामि पश्य माम्
pakṣmasaṃpātaje kāle nakulena vinākṛtāna labhāmi sukhaṃ vīra sādya jīvāmi paśya mām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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