महाभारत 5.88.44महाभिजनसंपन्ना सर्वकामैः सुपूजिताईश्वरी सर्वकल्याणी द्रौपदी कथमच्युतmahābhijanasaṃpannā sarvakāmaiḥ supūjitāīśvarī sarvakalyāṇī draupadī kathamacyutaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें