महाभारत 5.88.63
साहं पित्रा च निकृता श्वशुरैश्च परंतपअत्यन्तदुःखिता कृष्ण किं जीवितफलं मम
sāhaṃ pitrā ca nikṛtā śvaśuraiśca paraṃtapaatyantaduḥkhitā kṛṣṇa kiṃ jīvitaphalaṃ mama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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