महाभारत 5.9.38
यत्सुरापं तु तस्यासीद्वक्त्रं त्रिशिरसस्तदाकलविङ्का विनिष्पेतुस्तेनास्य भरतर्षभ
yatsurāpaṃ tu tasyāsīdvaktraṃ triśirasastadākalaviṅkā viniṣpetustenāsya bharatarṣabha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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