महाभारत 5.9.3
त्वष्टा प्रजापतिर्ह्यासीद्देवश्रेष्ठो महातपाःस पुत्रं वै त्रिशिरसमिन्द्रद्रोहात्किलासृजत्
tvaṣṭā prajāpatirhyāsīddevaśreṣṭho mahātapāḥsa putraṃ vai triśirasamindradrohātkilāsṛjat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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