महाभारत 5.90.26
तेषां समुपविष्टानां बहूनां दुष्टचेतसाम्कथं मध्यं प्रपद्येथाः शत्रूणां शत्रुकर्शन
teṣāṃ samupaviṣṭānāṃ bahūnāṃ duṣṭacetasāmkathaṃ madhyaṃ prapadyethāḥ śatrūṇāṃ śatrukarśana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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