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महाभारत 5.90.28
या मे प्रीतिः पाण्डवेषु भूयः सा त्वयि माधवप्रेम्णा च बहुमानाच्च सौहृदाच्च ब्रवीम्यहम्
yā me prītiḥ pāṇḍaveṣu bhūyaḥ sā tvayi mādhavapremṇā ca bahumānācca sauhṛdācca bravīmyaham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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