महाभारत 5.91.18
मम धर्मार्थयुक्तं हि श्रुत्वा वाक्यमनामयम्न चेदादास्यते बालो दिष्टस्य वशमेष्यति
mama dharmārthayuktaṃ hi śrutvā vākyamanāmayamna cedādāsyate bālo diṣṭasya vaśameṣyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें