महाभारत 5.91.3
सत्यं प्राप्तं च युक्तं चाप्येवमेव यथात्थ माम्शृणुष्वागमने हेतुं विदुरावहितो भव
satyaṃ prāptaṃ ca yuktaṃ cāpyevameva yathāttha māmśṛṇuṣvāgamane hetuṃ vidurāvahito bhava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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