महाभारत 5.92.24
पुरं कुरूणां संवृत्तं द्रष्टुकामं जनार्दनम्सवृद्धबालं सस्त्रीकं रथ्यागतमरिंदमम्
puraṃ kurūṇāṃ saṃvṛttaṃ draṣṭukāmaṃ janārdanamsavṛddhabālaṃ sastrīkaṃ rathyāgatamariṃdamam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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