महाभारत 5.92.36
उत्तिष्ठति महाराजे धृतराष्ट्रे जनेश्वरेतानि राजसहस्राणि समुत्तस्थुः समन्ततः
uttiṣṭhati mahārāje dhṛtarāṣṭre janeśvaretāni rājasahasrāṇi samuttasthuḥ samantataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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