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महाभारत 5.93.13
त्वय्यधीनः शमो राजन्मयि चैव विशां पतेपुत्रान्स्थापय कौरव्य स्थापयिष्याम्यहं परान्
tvayyadhīnaḥ śamo rājanmayi caiva viśāṃ pateputrānsthāpaya kauravya sthāpayiṣyāmyahaṃ parān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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