महाभारत 5.93.31
न पश्येम कुरून्सर्वान्पाण्डवांश्चैव संयुगेक्षीणानुभयतः शूरान्रथेभ्यो रथिभिर्हतान्
na paśyema kurūnsarvānpāṇḍavāṃścaiva saṃyugekṣīṇānubhayataḥ śūrānrathebhyo rathibhirhatān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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