महाभारत 5.93.32समवेताः पृथिव्यां हि राजानो राजसत्तमअमर्षवशमापन्ना नाशयेयुरिमाः प्रजाःsamavetāḥ pṛthivyāṃ hi rājāno rājasattamaamarṣavaśamāpannā nāśayeyurimāḥ prajāḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें