महाभारत 5.93.38
बाला विहीनाः पित्रा ते त्वयैव परिवर्धिताःतान्पालय यथान्यायं पुत्रांश्च भरतर्षभ
bālā vihīnāḥ pitrā te tvayaiva parivardhitāḥtānpālaya yathānyāyaṃ putrāṃśca bharatarṣabha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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