महाभारत 5.93.40
आहुस्त्वां पाण्डवा राजन्नभिवाद्य प्रसाद्य चभवतः शासनाद्दुःखमनुभूतं सहानुगैः
āhustvāṃ pāṇḍavā rājannabhivādya prasādya cabhavataḥ śāsanādduḥkhamanubhūtaṃ sahānugaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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