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महाभारत 5.93.58
स तामवस्थां संप्राप्य कृष्णां प्रेक्ष्य सभागताम्क्षत्रधर्मादमेयात्मा नाकम्पत युधिष्ठिरः
sa tāmavasthāṃ saṃprāpya kṛṣṇāṃ prekṣya sabhāgatāmkṣatradharmādameyātmā nākampata yudhiṣṭhiraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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