महाभारत 5.94.11
तपस्विनो महात्मानो वेदव्रतसमन्विताःउदीर्यमाणं राजानं क्रोधदीप्ता द्विजातयः
tapasvino mahātmāno vedavratasamanvitāḥudīryamāṇaṃ rājānaṃ krodhadīptā dvijātayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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