महाभारत 5.94.35
ततो राजा तयोः पादावभिवाद्य महात्मनोःप्रत्याजगाम स्वपुरं धर्मं चैवाचिनोद्भृशम्
tato rājā tayoḥ pādāvabhivādya mahātmanoḥpratyājagāma svapuraṃ dharmaṃ caivācinodbhṛśam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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