महाभारत 5.96.2
नारदोऽथाब्रवीदेनं क्व भवान्गन्तुमुद्यतःस्वेन वा सूत कार्येण शासनाद्वा शतक्रतोः
nārado'thābravīdenaṃ kva bhavāngantumudyataḥsvena vā sūta kāryeṇa śāsanādvā śatakratoḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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