महाभारत 5.96.4तमुवाचाथ स मुनिर्गच्छावः सहितावितिसलिलेशदिदृक्षार्थमहमप्युद्यतो दिवःtamuvācātha sa munirgacchāvaḥ sahitāvitisalileśadidṛkṣārthamahamapyudyato divaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें