महाभारत 5.97.8अत्र नानाविधाकारास्तिमयो नैकरूपिणःअप्सु सोमप्रभां पीत्वा वसन्ति जलचारिणःatra nānāvidhākārāstimayo naikarūpiṇaḥapsu somaprabhāṃ pītvā vasanti jalacāriṇaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें