महाभारत 5.98.3अत्र मायासहस्राणि विकुर्वाणा महौजसःदानवा निवसन्ति स्म शूरा दत्तवराः पुराatra māyāsahasrāṇi vikurvāṇā mahaujasaḥdānavā nivasanti sma śūrā dattavarāḥ purāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें