महाभारत 6.100.3
तान्निवार्य शरौघेण शक्रसूनुर्महारथःसुशर्मणो रणे योधान्प्राहिणोद्यमसादनम्
tānnivārya śaraugheṇa śakrasūnurmahārathaḥsuśarmaṇo raṇe yodhānprāhiṇodyamasādanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें