महाभारत 6.100.7
पादाताश्चापि शस्त्राणि समुत्सृज्य महारणेनिरपेक्षा व्यधावन्त तेन तेन स्म भारत
pādātāścāpi śastrāṇi samutsṛjya mahāraṇenirapekṣā vyadhāvanta tena tena sma bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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