महाभारत 6.100.9
तद्बलं प्रद्रुतं दृष्ट्वा पुत्रो दुर्योधनस्तवपुरस्कृत्य रणे भीष्मं सर्वसैन्यपुरस्कृतम्
tadbalaṃ pradrutaṃ dṛṣṭvā putro duryodhanastavapuraskṛtya raṇe bhīṣmaṃ sarvasainyapuraskṛtam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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