महाभारत 6.101.4
रक्ष्यमाणो हि समरे भीष्मोऽस्माकं पितामहःनिहन्यात्समरे यत्तान्पाञ्चालान्पाण्डवैः सह
rakṣyamāṇo hi samare bhīṣmo'smākaṃ pitāmahaḥnihanyātsamare yattānpāñcālānpāṇḍavaiḥ saha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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