महाभारत 6.103.18
सोऽहमेवं गते कृष्ण निमग्नः शोकसागरेआत्मनो बुद्धिदौर्बल्याद्भीष्ममासाद्य संयुगे
so'hamevaṃ gate kṛṣṇa nimagnaḥ śokasāgareātmano buddhidaurbalyādbhīṣmamāsādya saṃyuge
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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