महाभारत 6.103.21
क्षयं नीतोऽस्मि वार्ष्णेय राज्यहेतोः पराक्रमीभ्रातरश्चैव मे शूराः सायकैर्भृशपीडिताः
kṣayaṃ nīto'smi vārṣṇeya rājyahetoḥ parākramībhrātaraścaiva me śūrāḥ sāyakairbhṛśapīḍitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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