महाभारत 6.103.2
ततो युधिष्ठिरो राजा संध्यां संदृश्य भारतवध्यमानं बलं चापि भीष्मेणामित्रघातिना
tato yudhiṣṭhiro rājā saṃdhyāṃ saṃdṛśya bhāratavadhyamānaṃ balaṃ cāpi bhīṣmeṇāmitraghātinā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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