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महाभारत 6.103.32
यः शत्रुः पाण्डुपुत्राणां मच्छत्रुः स न संशयःमदर्था भवदर्था ये ये मदीयास्तवैव ते
yaḥ śatruḥ pāṇḍuputrāṇāṃ macchatruḥ sa na saṃśayaḥmadarthā bhavadarthā ye ye madīyāstavaiva te
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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