महाभारत 6.103.41
नियतं समवाप्स्यामि सर्वमेव यथेप्सितम्यस्य मे पुरुषव्याघ्र भवान्नाथो महाबलः
niyataṃ samavāpsyāmi sarvameva yathepsitamyasya me puruṣavyāghra bhavānnātho mahābalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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