महाभारत 6.103.75
य एष द्रौपदो राजंस्तव सैन्ये महारथःशिखण्डी समराकाङ्क्षी शूरश्च समितिंजयः
ya eṣa draupado rājaṃstava sainye mahārathaḥśikhaṇḍī samarākāṅkṣī śūraśca samitiṃjayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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