महाभारत 6.104.4
कृत्वा व्यूहं महाराज सर्वशत्रुनिबर्हणम्शिखण्डी सर्वसैन्यानामग्र आसीद्विशां पते
kṛtvā vyūhaṃ mahārāja sarvaśatrunibarhaṇamśikhaṇḍī sarvasainyānāmagra āsīdviśāṃ pate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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