महाभारत 6.104.53नावहास्या यथा वीर भवेम परमाहवेतथा कुरु रणे यत्नं साधयस्व पितामहम्nāvahāsyā yathā vīra bhavema paramāhavetathā kuru raṇe yatnaṃ sādhayasva pitāmahamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें