महाभारत 6.107.36
हैडिम्बस्तु ततो राजन्दुर्मुखं शत्रुतापनम्आजघानोरसि क्रुद्धो नवत्या निशितैः शरैः
haiḍimbastu tato rājandurmukhaṃ śatrutāpanamājaghānorasi kruddho navatyā niśitaiḥ śaraiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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