महाभारत 6.107.50
चेकितानं रणे क्रुद्धं भीष्मं प्रति जनेश्वरचित्रसेनस्तव सुतः क्रुद्धरूपमवारयत्
cekitānaṃ raṇe kruddhaṃ bhīṣmaṃ prati janeśvaracitrasenastava sutaḥ kruddharūpamavārayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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