महाभारत 6.108.16
हृष्यन्ति रोमकूपानि सीदतीव च मे मनःचिन्तयित्वा महाबाहो भीष्मार्जुनसमागमम्
hṛṣyanti romakūpāni sīdatīva ca me manaḥcintayitvā mahābāho bhīṣmārjunasamāgamam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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