महाभारत 6.110.42
ततः प्रववृते युद्धं कौरवाणां भयावहम्तत्र पाण्डुसुतैः सार्धं भीष्मस्य विजयं प्रति
tataḥ pravavṛte yuddhaṃ kauravāṇāṃ bhayāvahamtatra pāṇḍusutaiḥ sārdhaṃ bhīṣmasya vijayaṃ prati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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