महाभारत 6.111.19
अयं चापि महेष्वासः पार्षतो वाहिनीपतिःभीमसेनश्च समरे पालयिष्यति वो ध्रुवम्
ayaṃ cāpi maheṣvāsaḥ pārṣato vāhinīpatiḥbhīmasenaśca samare pālayiṣyati vo dhruvam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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