महाभारत 6.112.12
सोऽतिविद्धो महेष्वासो द्रोणपुत्रेण सात्वतःद्रोणपुत्रं त्रिभिर्बाणैराजघान महायशाः
so'tividdho maheṣvāso droṇaputreṇa sātvataḥdroṇaputraṃ tribhirbāṇairājaghāna mahāyaśāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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