महाभारत 6.112.17तौ तु तत्र महेष्वासौ महामात्रौ महारथौमहता शरवर्षेण परस्परमवर्षताम्tau tu tatra maheṣvāsau mahāmātrau mahārathaumahatā śaravarṣeṇa parasparamavarṣatāmइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें