महाभारत 6.112.45
सोऽन्यत्कार्मुकमादाय पार्षतः परवीरहाद्रोणस्य मिषतो युद्धे प्रेषयामास सायकान्
so'nyatkārmukamādāya pārṣataḥ paravīrahādroṇasya miṣato yuddhe preṣayāmāsa sāyakān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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