महाभारत 6.115.25
स संज्ञामुपलभ्याथ भारद्वाजः प्रतापवान्निवारयामास तदा स्वान्यनीकानि मारिष
sa saṃjñāmupalabhyātha bhāradvājaḥ pratāpavānnivārayāmāsa tadā svānyanīkāni māriṣa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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