महाभारत 6.115.2
तदैव निहतान्मन्ये कुरूनन्यांश्च पार्थिवान्न प्राहरद्यदा भीष्मो घृणित्वाद्द्रुपदात्मजे
tadaiva nihatānmanye kurūnanyāṃśca pārthivānna prāharadyadā bhīṣmo ghṛṇitvāddrupadātmaje
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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