महाभारत 6.117.2
श्रुत्वा तु निहतं भीष्मं राधेयः पुरुषर्षभःईषदागतसंत्रासः त्वरयोपजगाम ह
śrutvā tu nihataṃ bhīṣmaṃ rādheyaḥ puruṣarṣabhaḥīṣadāgatasaṃtrāsaḥ tvarayopajagāma ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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